सफलता और असफलता सब्द मे क्या फ़र्क है आपसे पूछा जाए तो सायद यही कहे की असफलता का "अ" निकल दीजिए| बस यही असफलता का "अ" ही निकलना है| बहुत से लोग है जो जिंदगी से मिली एक हार को सब कुछ ख़त्म मान लेते है पर जिंदगी मे मिली हार ही हमे जिंदगी मे आगे बढ़ना सिखाती है, आख़िर कमिया कहा रह गयी यह बताती है और अब आगे उन्हे कैसे बेहतर करना है इसका आकलन करना सिखाती है, जिससे की आने वाले लक्ष्य को हम पा सके| पर यह तभी संभव होगा जब हम अपनी असफलता से परेसान ना हो बल्कि उसे भी स्वीकार करना सीखे तभी हम जिंदगी मे आगे आने वाले मौको को सफलता मे बदल पाएँगे| फिर जीवन मे एक अलग ही बात होगी और आप लोगो के लिए प्रेरणास्रोत बन पाएँगे जब लोग आपसे सीखते है तो आप समाज को बहुत कुछ देते है| यही सफलता का सही पर्याय है|
"रात है तो सवेरा भी होगा,
मेहनत है तो रोज़गार भी होगा,
जज़्बा है तो राहे भी होंगी,
बस बढ़ते रहो, बढ़ते रहो"
एक दिन बिखरेगी धूप,
हर कही हर जगह,
तुम्हारे जज़्बे की,
तुम्हारी मेहनत की,
"सभी फोटो गूगल से साभार"
"रात है तो सवेरा भी होगा,
मेहनत है तो रोज़गार भी होगा,
जज़्बा है तो राहे भी होंगी,
बस बढ़ते रहो, बढ़ते रहो"
एक दिन बिखरेगी धूप,
हर कही हर जगह,
तुम्हारे जज़्बे की,
तुम्हारी मेहनत की,
"सभी फोटो गूगल से साभार"


